भंते सुमेधानंद और उनकी विज्ञान (भाग Book 1) (Hindi Edition) por सुमेध जग्रवाल

January 21, 2020

भंते सुमेधानंद और उनकी विज्ञान (भाग Book 1) (Hindi Edition) por सुमेध जग्रवाल

Titulo del libro: भंते सुमेधानंद और उनकी विज्ञान (भाग Book 1) (Hindi Edition)

Autor: सुमेध जग्रवाल

Fecha de lanzamiento: January 24, 2018

Número de páginas: 98 páginas

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हिन्दू , मुस्लिम और ईसाई यह विदेशी काल्पनिक संस्कृति हैं जो भारतीयों को आपस में विभाजित करके वर्ग संघर्ष कराती हैं । बुद्ध ने पूजा पाठ और अंधविश्वास का मार्ग नही दिया । उन्होंने अपने पूजने का ज्ञान नही दिया । उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा , मैं मोक्ष दाता नही , विज्ञानी मार्ग दाता हूँ । उन्होंने संसार के लिए विज्ञानी मार्ग दिया था । जिसको विज्ञानी ज्ञान मानना है वो माने । जिनको अंधविश्वास मानना है , वे अंधविश्वास को माने । तथागत बुद्ध और उसके अनुयायी कभी नही कहते कि आप बुद्ध मार्ग को मानो । वे आपको उस मार्ग का मार्ग दर्शन करते हैं । आपको यह विज्ञानी ज्ञान अच्छा लगे तो अनुसरण करो अन्यथा मत करो । तथागत ने यह भी मार्ग दर्शित किया कि जो वस्तु आपको अपनी पाँचों ज्ञानेन्द्रियों से महसूस होती है , उसी का अनुसरण करें , शेष सब बकवास है । इसी आधार पर सभी सरकारी व्यवहार में तथागत बुद्ध के मार्ग का अनुसरण किया गया है , तीनों विदेशी संस्कृतियों का नही । यदि उक्त तीनों संस्कृतियाँ देशी होती तो हर सरकारी कार्य में उनका ही अनुसरण होता । भारतीय संविधान भी इन तीनों संस्कृतियों को विदेशी ही मानता है । संविधान के अनुच्छेद - 46 में लिखा है कि भारत की हर वस्तु पर भारतीय मूलवासियों का ही आधिपत्य होगा ।
न्यूटन के पहले भी गुरुत्वाकर्षण था , लेकिन उसका ज्ञान नही था । उसका ज्ञान न्यूटन ने कराया था । इसी प्रकार ब्राह्मणी लोगों को अपने धर्म ग्रन्थों के सम्बन्ध में इससे पहले ज्ञान नही था , अब उनको अपने अश्लील धर्म ग्रन्थों के बारे में ज्ञान कराया जा रहा है । पहले ब्राह्मणी मीडिया था जो हमारी सम्यक बातों को अनसुना करता था । लेकिन आज अंतर्राष्ट्रीय मीडिया है , जिसके माध्यम से हम भारतीय लोग तीनों विदेशी संस्कृतियों की असलियत भारतीय लोगों के समक्ष ला रहे हैं । ब्राह्मणी लोग आजादी से पूर्व अपने आपको ब्राह्मण , क्षत्रिय और वैश्य बोलते थे और भारतीय लोगों को शूद्र और अतिशूद्र बोलते थे । लेकिन आजादी के बाद ब्राह्मणी लोगों ने देखा कि सत्ता अब बहुमत से बनेगी तो उन्होंने भारतीय लोगों को शूद्र के स्थान पर हिन्दू बोलना आरम्भ कर दिया । जबकि ब्राह्मणवाद का कोई भी सदस्य अपने आपको हिन्दू नही बोलता है , वह अपने आपको वर्णों के अनुसार ही दर्शित करता है । जब उन पर कोई आपत्ति या सत्ता की बात होती है , तो वह हिन्दू हिन्दू चिल्लाता है । अन्यथा वह अपने आपको हिन्दू कभी नही कहता । इसी प्रकार आज तक ये ब्राह्मणी लोग भारत के लोगों को मूर्ख बनाते आये हैं । वर्तमान परिवेश को देख उनको अपनी अश्लील व्यवस्था को त्यागना ही होगा , उसी में उनका भला है । भंते सुमेधानंद और उनकी विज्ञान नामक पुस्तक में वार्तालाप को एक विज्ञानी रूप देकर प्रमाणित किया है । जो लोग पाखण्डी और अंधविश्वासी हैं , उनको ये वार्तालाप कड़वा लगेगा , परन्तु सत्य का ज्ञान होने पर ये ही कड़वापन उनको मीठा लगने लगेगा ।